Sunday, September 10, 2017

कलम मरती है तो बहुत कुछ मर जाता है

बांध दिए जाने और ख़त्म हो जाने की बीच से जाने वाली
संकरी गलियों में वो जूझता रहा
शब्दों के तहखाने से बहुत दूर निकल चुका
वापसी में अपने ही पदचिन्हों को ढूंडने की नाकाम कोशिश करता   

बहुत कुछ पाने की चाहत में
उसने जो बचाया था वो भी ख़त्म कर दिया
और अब अपनी ही बनाई भूलभुलैया में खुद को तलाशता
भटकता है सुबह-शाम

जंगल की अज्ञात कुटिया में
लालटेन की बुझती हुई रौशनी की आड़ में
वो अपनी परझाई को टटोलते हुए
ज़मी पर लिख रहा था
कलम मरती है तो बहुत कुछ मर जाता है......


Sunday, February 26, 2017

नज़र तुम आती हो


संवारता हूँ तुझको
तेरी जुल्फों से खेलता हूँ
तेरी माथे की लकीरों को पढता हूँ बार बार
और अपने ख्यालों को उनमें पिरो देता हूँ
फिर एक छोटा सा काला टीका लगा
सारी दुनिया से छुपा लेता हूँ तुमको
इस तरह हर बार जब
देखता हूँ आईने में खुद को
नज़र तुम आती हो

ढलती शाम यादों की तश्तरी लेकर
दिल में उतर जाती है
धीरे धीरे शाम को तन्हां कर जाती है
टटोलता हूँ अपने मन को तो
तेरे अहसास में मेरी आवाज घुल जाती हैं
ख्वाइशें करता हूँ तेरे पास आ जाने की
तो तेरी महक से रूह भी महक जाती है
ओर देखता हूँ आईने में खुद को
तुम नज़र आती हो

रूठता हूँ तुमसे तो ख्यालों में
तुम उधम मचाती हो
आखों से अपने यमुना बहती हो
मै ठहर जाता हूँ
स्वप्न से तुमको जगाता हूँ
ख्यालों की गठ्ठारियों को खोलकर
तुझमें समां जाता हूँ
और इस तरह हर बार जब
देखता हूँ आईने में खुद को

नज़र तुम आती हो

Wednesday, January 20, 2016

तुम

मेरा सबसे प्यारा तोहफा हो तुम,
जिस दिन से तुम्हे पाया है
जीवन की निराशाओं को आशाओं में बदलते देखा है मैंने,
मेरे होने का मतलब शायद तुझमें ही तो छुपा है
तुम लडती-झगडती ,हंसतीखिलखिलाती मेरे जीवन को धाराप्रवाह बनाती हो
और मै बहता हूँ बिना किसी रूकावट के

कभी
लगता है जैसे की मै किसी नदी सा हूँ और तुम मेरा किनारा
और साथ-साथ हम दूर चलते जा रहे हैं
मंजिल का पता हमें न मालूम हो लेकिन फिर भी
एक दुसरे से लिपटे हुए बहते चले जा रहे है 
तुम्हारा होना ही तो मेरे होने का वजूद है

तुम्हारी धड़कने मेरे कानों में गूंजती एक मधुर संगीत सी लगती है
और
मै इस संगीत में डूब कर सब कुछ भूल जाता हूँ
तुम्हारीं धड़कने ही तो शायद मेरे जीवन की रफ़्तार हैं

तुम्हारी आँखें मेरे सपनों का समुन्दर हैं
जिसकी गहराई मेरे सपनों को गाढ़ा कर देती हैं
और इन सपनों में मै अपना संसार संजोता हूँ
तुम्हारी आँखें ही तो शायद मेरे जीवन की रौशनी हैं


तुम्हारे साथ ही जिन्दगी की कहानी है
और तुम्हारे साथ ही ये जिंदगी बितानी है

एकांत

चलो साथी तुमको साथ लेकर कहीं दूर चलूँ

इस शोर से दूर किसी एकांत में ,

जहाँ हम जी भर कर  बातें करेंगे

प्यार से भरी बातें

नफरत का एक भी शब्द हम अपने आवाज़ में नहीं आने देंगे

लेकिन तुम रोना नहीं

तुम्हारे रोने से मुझे उस शोर में लौटने का भय दिखाई देने लगता है  

तुम मुझे अपने खुशियों के गीत सुनना जिसे सुन कर मैं सारे संसार के खुशियों को 

जी सकूँ

तुम हिन्दू मुस्लिम की बात न करना  अमीर गरीब की भी नहीं

वरना मै वापस उस शोर में गम हो जाऊंगा जिससे दूर हम निकल कर आ रहे है 

हमारे दरमियां

अप्रदर्शित स्नेह सा है हमारे दरमियां,
                        एक दूसरे का साथ
और प्यारा सा अहसास अब है हमारे दरमियां ,
गुज़ारे है साथ बहुत से हसीन लम्हे हमने ,
इन लम्हों के बागबान अब है हमारे दरमियां,
बीते दिनों कि यादों का अम्बार सा लगा है ,
इन यादों की मिठास का स्वाद अब है हमारे दरमियां ,
फासले चाहे भले ही आ गये हो राहों में ,
                                          फिर भी इन फ़ासलों की करीबियां अब है हमारे दरमियां,
कुछ अनकही सी बातें है कुछ अनसुनी कहानियां ,
बेजुबान शब्दों कि दास्तान अब है हमारे दरमियां,
ये दास्तान ये अहसास ये बागबान ,
कभी न बिखरने देने कि एक शर्त है अब हमारे दरमियां|    

-    श्रुतिमा दीदी के लिए 2012

कलम मरती है तो बहुत कुछ मर जाता है

बांध दिए जाने और ख़त्म हो जाने की बीच से जाने वाली संकरी गलियों में वो जूझता रहा शब्दों के तहखाने से बहुत दूर निकल चुका वापसी में अपन...